शुक्रवार, 21 जून 2024

योग दिवस पर





 1. स्वस्थ देह मस्तिष्क साफ, होता जीवन आसान।

 नित्य योग से प्राप्तव्य, दैहिक, दैविक आध्यात्म।।

2. योग भगाता रोग, कह गए हैं सब विद्वान।

शुद्ध आत्मा निर्मल मन, सब हैं  खुशियों की खान।।

3. ब्रह्म मुहूर्त में जाग, करो योग व्यायाम सब।

कर लो यह नित काम, रोज़ सुबह सब नियम से।।

4. सब हों जागृत भाव, पंच प्राण और सप्त चक्र।

हो आत्म से अनात्म, देह आत्म का योग जब।।

5. यह है ज्ञान विज्ञान, योग नहीं व्यायाम बस।

स्मृतियों का यह सार, द्वार ब्रह्म और मोक्ष का।।








8 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

अति उत्तम शानदार जानदार रचना है

बेनामी ने कहा…

शुक्रिया 🙂🙏

Swatantra ने कहा…

Badhiya

डॉ 0 विभा नायक ने कहा…

Shukriya🙏

बेनामी ने कहा…

Sundar likha hai badhai

डॉ 0 विभा नायक ने कहा…

Shukriya🙏

MANOJ KAYAL ने कहा…

अभिनव सृजन

डॉ 0 विभा नायक ने कहा…

Shukriya🙏