मंगलवार, 15 अगस्त 2023

जय हिंद

 





मुझे तुमसे मोहब्बत है

तुम्हें मैं प्यार करती हूँ

तुम्हारे नाम पर भारत

मैं दिल कुर्बान करती हूँ।

तुम्हारी ही धरा पर मैं 

पली हूँ शान से अब तक 

तुम्हारी ही धरा से मैं

चली हूँ चाँद पर अब तक

रहे जीवन तुम्हारे ही लिये

सदा यह चाह रखती हूँ

तुम्हारे नाम पर भारत 

मैं दिल कुर्बान करती हूँ

यही आशीष सी मिट्टी

जहाँ है कृष्ण का बचपन

धनुर्धारी सिया के राम 

का आदर्श है पग-पग

सजे चन्दन तिलक सी शीष पर

यही अरमान रखती हूँ

तुम्हारे नाम पर भारत

मैं दिल कुर्बान करती हूँ

यहीं हैं साधनारत पितृ सम 

योगी हिमालय भी

भगीरथ कर्म को साधे

नित पाप हरतीं माँ त्रिपथगा भी

शिवालिक से निविड़ जीवन

शिवोऽहम् भाव को भरते

तेन त्यक्तेन भुंजीथा:

निरंतर साक्ष्य यह धरते 

करूँ धारण हृदय में ज्ञान यह 

कामना निष्पाप करती हूँ

तुम्हारे नाम पर भारत मैं दिल कुर्बान करती हूँ

जय हिंद🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳







रविवार, 13 अगस्त 2023

ज्ञान वाणी

अरे सुन सपना, सब से कह दे कि शाम ठीक चार बजे पहुँच जाएँ। आज का कार्यक्रम तेरे जिम्मे। समझ गई न तू?
हाँ माँ आप चिंता मत करो, आपकी ही तो बेटी हूँ, सब संभाल लूँगी। कहते हुए, महिला सेवा समिति की सदस्य और रूपल जी की बेटी सपना अपने काम पर लग गई। हाथ में कॉपी पैन लिये वह जाँच रही थी कि सब ठीक तो है, कुछ छूटा तो नहीं कि अचानक फोन झनझना उठा! आज के कार्यक्रम की अध्यक्षा जी का फोन था।
सपना जी, ज़रा लोकेशन बताएंगी क्या?
जी, जी अभी भेज ही देती हूँ आपके व्हाट्स एप पर। वैसे मेन रोड से उल्टे हाथ की तरफ़ चौथी गली में आकर सीधे हाथ की तरफ़ जो चौथी बिल्डिंग है न, गुलाबी रंग की उसी में पहले माले पर आना है.....
जी...जी... ठीक चार बजे।
कट....
उफ्फ!!! अरे मैं कहाँ थी... हाँ रिफ्रेश्मेंट, मेंहदी, कुर्सियाँ... और...और...
और म्यूज़िक सिस्टम। उसका अरेंजमेंट किया कि  नहीं??
पीछे से रूपल बोली।
नहीं माँ वो तो.....
भूल गई... क्यों? चल अभी फोन लगा मानुषी जी को, वो करा देंगी। 
सपना ने राहत की साँस ली। मानुषी जी के पति ठहरे एडवोकेट। अर्धान्गिनी जी के एक आदेश पर इधर फोन गया उधर काम हुआ समझो। 
बढ़िया म्यूज़िक सिस्टम भी आ गया, चार घन्टे के लिये 2000 में। अध्यक्षा जी भी और सब बढ़िया। 
कुछ ही देर में विधि-विधान के साथ अध्यक्षा जी का सम्बोधन हुआ। महोदया जितना पढ़ कर आई थीं सब ज्ञान देकर विराज गईं। फिर शुरू हुआ नाच-गाना, खेल, पहेली, म्यूजिकल चेयर खाना पीना। इतने सब में चार घन्टे न जाने कब खर्च हो गए, पता ही न चला। कार्यक्रम अभी भी चालू था।  इतने में रूपल जी भी आईं। समिति की वरिष्ठ सदस्य और सर्वे-सर्वा। भला उनके ज्ञान के बिना कुछ संभव था? बहुत अच्छे से उन्होंने बताया कि महिलाओं को अभी खुद पर बहुत काम करने की ज़रूरत है। समाज और राष्ट्र् से पहले खुद को सुधारो। गरीबों की जिस तरह हो सके वैसी मदद करो। किसी का भी अहित न हो। 
भाषण भी खत्म हुआ और कार्यक्रम भी।
कुल मिलाकर चार घन्टे का कार्यक्रम 8 घन्टे पर निबटा ही था कि म्यूजिक सिस्टम वाला बोला- 3 हज़ार रूपये।
सपना तो दे ही देती कि रूपल ने आँखें तरेरीं, 
हां भैया? काहे के तीन हज़ार?
मैडम 4 घन्टे की बात हुई थी, मालिक ने कहा था चार के ऊपर हज़ार रुपया होगा। आपने तो और चार घन्टे लगा दिये!
सुन हम तुझे नहीं देंगे 1500 के ऊपर, समझ ले तू। रूपल चिल्लाई। 
अरे कैसी बात करती हो मैडम, मालिक नौकरी से निकाल देगा!! तो हम क्या करें? हो जाता है थोड़ा ऊपर-नीचे। समझ ले सब तेरी बहन-बेटियाँ हैं..
आगे और भी कार्यक्रम हैं, कह दियो अपने मालिक से।
अरे ऐसे मत करो मैडम, म्यूज़िक सिस्टम वाला गिड़गिड़ाया।
पर महिला प्रमुख कहाँ मानने वाली थीं! जानती थीं कि पैसे कहाँ और कैसे बचाने हैं। उधर म्यूज़िक सिस्टम वाला भी गाँव-घर छोड़कर शहर आया, सीधा सा आदमी था। शहरी गुण्डई अभी उसने सीखी नहीं थी, अत: कुछ बोल न सका।
उधर मैडम ने 1500 रुपये उसके म्यूज़िक सिस्टम पर पटके और पलटन के साथ रुखसत हो गईं।