सोमवार, 28 जुलाई 2008

प्रमाणपत्र

वह ईश्वर है, महान है,
स्वामी है पुरूष यूँ ही नहीं है वह!
वह शुद्ध है, पवित्र है, निर्दोष है,
वह रक्षक है, कर्ता है भर्ता भी है,
हाँ ताकतवर भी है, इस्सीलिये.......
औरत की जिंदगी का नियामक है वह,
कुछ भी उसके लिए निषिद्ध नहीं
क्यूंकि वह कभी भी ग़लत नहीं,
यह सच है। हाँ ! हाँ! यह सच है!
प्रमाण चाहिए ????????
लो अभी देती हूँ....
प्रमाण है पुरुषों को सतीत्व के प्रमाण पत्र के ज़रूरत नहीं पड़ती
क्यूंकि.......
कीचड़ में खिले कमल की तरह uska चरित्र भी निर्मल, पावन और पवित्र होता है....
परमेश्वर का दर्जा उसे यूँ ही नहीं मिल जाता.