रविवार, 2 अप्रैल 2023

स्वामी भले बिराजे जू- भाग 3

अब चले तो पैलो सोमवार एक जंगल में परो। उतै एक दाँय वालो दाँय हाँक रओ तो। भाट नैं कई तनक हमाई किसा सुन लो। 

दाँय वालो बोलो- कै जब तक तुमाई किसा सुनै, हमाई दाँय कौ का हुइये? भाट नैं कई ठीक है भैया ना सुनो। जैसईं भाट आगे बढ़ो सो ऊकी दाँय फर-फर बरन लगी। अब दाँय वालो चिल्लाओ - भैया तुमनैं का जादू कर दओ कै हमाई दाँय फर-फर  बरन लगी। भाट बोलो- कै हम का जानैं। जानैं तो हमाए स्वामी जू जानैं। 

दाँय वालो बोलो- भैया हमैं सुना दो अपने स्वामी जू की कथा।

भाट नैं कथा सुनाई औ ज्यों द्योलन और गुड़ को भोग लगाओ औ चुरुआ छिड़को सो दाँय दूनी चौगुनी हो गई। 

अब भाट आगे चले। चलत-चलत अब दूसरों सोमवार परो। सो जंगल में एक गड़रिया भेड़ें चरा रओ तो। भाट नैं कई कै भैया तनक हमाई किसा सुन लैयो। भाट की बात सुन कैं गड़रिया बोलो- जब तक हम तुमाई किसा सुनै हमाई भेड़ें न भग जैं? भाट नैं कई कै ठीक है भैया न सुनो। ऐसो कह कैं भाट आगे चले सो गड़रिया की सब भेड़ें हिरा गईं। अब गड़रिया चिल्लानों - ए भैया रुक जाओ, सुना दो अपनी किसा। भाट नैं पूजा बिस्तारी। गुरधानी को भोग लगाओ औ ज्यों चुरुआ छिड़को सो सब भेड़ें जईं की तईं हो गईं। 

अब भाट चलत-चलत और आगे बढ़े सो तीसरो सोमवार बड़ी बिटिया के इतै परो। सो भाट नै कई बड़ी बिटिया सें कैं बेटा पूजा करनें सो तनक व्यवस्था कर लो। बिटिया बोली कै तुम जौई सब करत करत गए ते औ जौई करत-करत आ गए।  इतै कोऊ नइयाँ भूखो प्यासो अबै तक। 

बिटिया की बात सुन कैं भाट नै कई कै ठीक है। कह कैं भाट आगे चले सो रस्ता में एक कोढ़ी मिलो। भाट नै कई कै भैया तनक हमाई किसा सुन लो। भाट की बात सुन कैं कोढ़ी बोलो- भैया सुना दो। 

अब भाट नै कोढ़ी के पेट पै जवा रख दये। पँचमेर कौ भोग लगाओ औ स्वामी जू की किसा कैबो शुरू करी। अब ज्यों किसा पूरी भई कोढ़ी की काया एक दम अच्छी हो गई। कोढ़ी हाथ जोर कैं बोलो- भैया तुमनै का जादू कर दओ कै हमाए सब कष्ट मिट गए!

कोढ़ी की बात सुनकैं भाट बोलो कै भैया हम का जानें, जानैं तौ हमाए स्वामी जू जानें औ हाथ जोर कैं आगे बढ़ गए।  

अब भाट चलत-चलत आगे पहुंचे सो चौथे सोमवार खां छोटी बिटिया कैं पहुंचे। बिटिया नै कई कै पिताजी जो व्यवस्था करने हो सो बता दो। भाट नै बताओ कै अब छप्पन भोजन कौ भोग लगनें। सो जो जैसो बन सके सो बना लो। तुम नदिया में नहा कैं आ जाओ। औ जो तुमाई धोती रेशम की हो जाए औ लोटा सौने को हो जाए सो चौकियो ना। बिटिया नै हओ कई औ चल दई नदिया। बा ज्यों नहा कैं निकरी सो खूब अच्छी धोती और सोने को लोटा हो गयो। बिटिया की आर्थिक हालत ठीक ना हती। सो बा अपने मौड़ा खां बनिया के इतै बिठार कैं पूजा की सब सामग्री औ छप्पन भोजन कौ सामान लै आई ती। इतै बनिया आओ सो बोलो- बैन तुमाए मौड़ा मैं तो जानै का जादू है,  हमाई तो आज खूब बिक्री भई। इत्ती तौ कबहुँ मइना भर मैँ नईं भई। 

अब भाट नैं पूजा बिस्तारी। किसा कही औ जो बेंत खड़के औ चुरुआ छिड़को सो छोटी बिटिया को घर महल सो हो गऔ। ऊकी दसा पलट गई। 

अब भाट आगे चले सो चलत चलत अब अपने गाँव की गैल आ गए। उनै दो ग्वालिन मिलीं। भाट नै उनसैं कई कै जाके कह तो भाटिन सैं कै आ गए तुमाए भाट। औ पूरे गाँव में न्योतउआ टिरउआ करा दो कैं भोज है, भाट कैं। अब जा खबर जब भाटिन खां मिली, कै भाट आ गए, सो बा तौ खुसी के मारें पागल हो गई। इत्ते में भाट पहुँच गए। भाटिन सैं पहलें तौ कछू बोलत ना बनो खुसी कैं मारें, फिर तनक संभली सो बोली- कैसो न्योतउआ टिरउआ। पहले तनक पिसन दो, दरन दो। 

भाट नै कई कै नईं। तुम तौ करा दो न्योतउआ टिरउआ सँगै। 

राजा खां भी न्योतो पहुँचो। राजा तौ ना पहुंचे पर खूब जनता पहुंची। सबनै खूब तारीफ करी। जनता कत जाए कै ऐसो भोज तो ना दओ राजा रहीस नैं, जैसो भोज दओ, भाट भिखारी नैं।  

अब राजा को दिमाग ठनको कै, भाट भिखारी खां ऐसो कौन सो खजानो हाथ लग गयो! रानी सैं बोले कै चलो, अपन तनक चल कैं देखें तौ। अब आए राजा भाट भिखारी कैं। भाट नैं जो बेंत खड़के, चुरुआ छिड़को सो, राजा समझ गए कैं इनईं बेंतन मैं कछू है। सो उनने रानी खां इसारो कर दओ। इतै रानी नैं कुँवर खां चूँटी लै लई। सो कुँवर रोन लगे। 

अब भाट नै कई कै महाराज कुँवर काय रोउत? अब राजा बोले कै अंदर जो बज रओ, कुँवर ऊके लाने रो रये। तुम बा चीज फौरन ल्या कै दै दो तुम कुँवर खां। अब भाट बिचारो का करतो, सो ऊनें स्वामी जू के पाँव परे औ दै दये बेंत। 

अब राजा नै गाँव भर मैं कबा दई कै राजा कै भोज है। सब जनता राजा के इतै पहुंची। अब राजा नै जो बेंत खड़काए सो खूब धुआँ होय और बेंत उचट-उचट कै लगें राजा-रानी और सब जनता खां। और राजा रानी को सब बिला गयो बौ अलग। उतै सैं बिटिया दमाद आ गए, उनको सब बिला गयो तो। सबनैं कई कै ऐसो का टोटका कर दओ कै हम औरन को सब बिला गयो। 

भाट बोलो कै हम का जानें, जानै सो स्वामी जू जानै। सब जनें बोले कै चलो स्वामी जू कैं। 

अब सब जनें चले सो सब खां पाँवन में कांटे लगें और खूब धूप लगै। पर भाट के पाँवन तरें मखमली घास होत जाए औ मूड़ पै बादल छाँह करत जाएँ। अब बिटिया दामाद और और राजा रानी बोले कै तुमई जाओ हम औरन के बस की नइयाँ। 

अब भाट पहुंचे जगन्नाथ जी कैं और फिर चिल्लाए- स्वामी जू स्वामी जू। 

भक्त की गुहार सुन कैं भगवान फिर आए औ बोले- काय रे भटुआ तैं ने तौ गैलई देख लई। बताओ अब का हो गयो। भाट नै सब बात बताई और कई कै तुमाओ दओ न राजा रानी के मारें कहा पाउत न बिटिया दमाद के मारें खा पाउत। 

भाट की बात सुन कैं भगवान हँसे। बोले- जाओ- राजा रानी कौ राजा रानी खां दओ औ बिटिया दामाद कौ बिटिया दमाद खां दओ औ तुमाओ तौ है ई सात पीढ़ियन खां। 

किसा हती सो हो गई।