रविवार, 12 नवंबर 2023

मेरा घर

 मेरे घर,

मेरे जादुई घर

मुझे तुझसे बेहद प्यार है

जब मैं नहीं होती तेरे साथ

तू तब भी होता है मेरे पास

 दुआओं और फिक्र की तरह

जब होती हूँ घबराई और अकेली सी

 थकी हारी और निराश सी

तेरा सुकून मुझे देता है सहारा

तू बनता है ढाल और खड़ा करता है मुझे

एक अव्यक्त ऊर्जा से

पर मैं 

कुछ भी तो नहीं कर पाती तेरे लिये

 तुझे ढंग से सजा तक तो पाती नहीं

जी चाहा भी तुझे रख तो पाती नहीं

बल्कि बिखरा ही देती हूँ तुझे 

अपनी आदतों की तरह

फिर भी अनगढ़ चाह सा

तू सजा रहता है मेरे दिल में

ओ मेरे करिश्माई घर

जब अल्फाज़ सिमट कर ठहर जाते हैं

तू मुझसे गहरे बतियाता है

और मैं सब समझ जाती हूँ

उदासी में भी मुस्कुरा जाती हूँ






2 टिप्‍पणियां:

MANOJ KAYAL ने कहा…

सरस कृति

डॉ 0 विभा नायक ने कहा…

शुक्रिया मनोज जी🙏