मंगलवार, 15 अगस्त 2023

जय हिंद

 





मुझे तुमसे मोहब्बत है

तुम्हें मैं प्यार करती हूँ

तुम्हारे नाम पर भारत

मैं दिल कुर्बान करती हूँ।

तुम्हारी ही धरा पर मैं 

पली हूँ शान से अब तक 

तुम्हारी ही धरा से मैं

चली हूँ चाँद पर अब तक

रहे जीवन तुम्हारे ही लिये

सदा यह चाह रखती हूँ

तुम्हारे नाम पर भारत 

मैं दिल कुर्बान करती हूँ

यही आशीष सी मिट्टी

जहाँ है कृष्ण का बचपन

धनुर्धारी सिया के राम 

का आदर्श है पग-पग

सजे चन्दन तिलक सी शीष पर

यही अरमान रखती हूँ

तुम्हारे नाम पर भारत

मैं दिल कुर्बान करती हूँ

यहीं हैं साधनारत पितृ सम 

योगी हिमालय भी

भगीरथ कर्म को साधे

नित पाप हरतीं माँ त्रिपथगा भी

शिवालिक से निविड़ जीवन

शिवोऽहम् भाव को भरते

तेन त्यक्तेन भुंजीथा:

निरंतर साक्ष्य यह धरते 

करूँ धारण हृदय में ज्ञान यह 

कामना निष्पाप करती हूँ

तुम्हारे नाम पर भारत मैं दिल कुर्बान करती हूँ

जय हिंद🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳







8 टिप्‍पणियां:

Aarti Gupta ने कहा…

मैम बहुत अच्छी कविता है| 😊इसका वर्णन करने के लिए तो मेरे पास शब्द ही नहीं है | 🙏🙏मैम कविता के शब्द ही बहुत अच्छे प्रयोग किया है आपने🤗 मैम आप को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 😊😊

डॉ 0 विभा नायक ने कहा…

शुक्रिया आरती। आपको भी स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ ❤🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳

Pammi singh'tripti' ने कहा…

आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 16अगस्त 2023 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
अथ स्वागतम शुभ स्वागतम।

डॉ 0 विभा नायक ने कहा…

शुक्रिया🇮🇳🙏

अनीता सैनी ने कहा…

जी नमस्ते ,
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (१६-०८-२०२३) को 'घास-फूस की झोंपड़ी'(चर्चा अंक-४६७७) पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित है।
सादर

डॉ 0 विभा नायक ने कहा…

Shukriya anita ji🇮🇳🙏

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

सुन्दर रचना

डॉ 0 विभा नायक ने कहा…

शुक्रिया सुशील जी🙏